अध्याय 27

इंडिगो मुझसे विनती कर रही थी। मैंने होंठ कसकर भींच लिए, लंबी पलकों की ओट में नज़रें झुका लीं, अंदर ही अंदर दर्दनाक जद्दोजहद से जूझती रही।

दूसरी तरफ जेम्स पूरे समय खामोश रहा, जिससे अंदाज़ा लगाना नामुमकिन था कि उसके मन में क्या चल रहा है।

जब मुझसे और सहा नहीं गया और मैं बोलने ही वाली थी, तभी वह अचान...

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